Wednesday, 23 November 2022

Give your hundred percent, Why?

आप हासिल तभी करोगे जब आप गहराई में उतरोगे वरना मोती तलहटी में ही रह जायेंगे। 

दोस्तों मेरा बेटा अपने जर्मन के Marks देख कर उदास था वो बोला मैंने Book पड़ी तो थी फिर भी 10 आये है 20 में से , मैंने पुछा आपने lesson पूरा पड़ा था या सिर्फ प्रश्न उत्तर किये थे तो उसने उत्तर दिया, कि सिर्फ पिछले Page के प्रश्न ही किये थे।  फिर मैंने बटे जो की 7 years old है उसको पुछा कि क्या प्रश्न बुक में से आये है तो उसने बताया हर पेज के ऊपर कुछ Notes Bold दिए है।  Teacher ने वही प्रश्न बना कर दे दिए इसीलिए मै जवाब नहीं दे पाया। 




मैंने उसे समझाया के भाई, अपना 100% दो तभी कुछ बनेगा। आपने बुक ऊपर ऊपर से पढ़ी जिस कारण आप पूरे उत्तर नहीं दे पाए

और मित्रो मजा तो तब आया कि उसने मुझे एक उदहारण दिया, कि यह तो मेरे साथ भी हुआ था  हुआ यो की कल में जब नहाने कि लिए बाल्टी में पानी भर रहा था तो काफी ठंडा पानी भरने कि बाद मैंने गर्म पानी डाला , हाथ भी लगा कर देखा पानी गरम था पर जब नहाने कि लिए पानी शरीर पैर डाला तो कम्पकम्पी बंध गई।  फिर मैंने पानी मिक्स किया तो देखा कि ऊपर ऊपर सिर्फ गरमा गरम पानी था बाकि तो सारा ठंडा ही पड़ा था। 

Usually, we perform all actions for the sake of performance. 

We study just to pass
We work just to earn
We worship just for fear 
We live in society just to be one of them..........

Guys, You can either give 0% or 100%. there is no between.

Some famous Quotes:

1. Luck is what you have left over after you give 100%

2. Always give your hundred percent unless you are donating blood

Now, if you are not getting what you are aspiring for............ Just ask yourself!

Is your 100% really 100%? : if No then please do not sell yourself short








Thursday, 17 November 2022

hai sambhav


 दोस्तों इस दुनिया में कुछ न कुछ हल हर प्रॉब्लम का है, *जैसे कहते है न की ऐसा ताला  ही नहीं बना जिसकी चाबी न हो*

आप लोग कहेंगे के हम सब कभी कभी इतने बड़ी प्रॉब्लम में होते है के हल दिखना तो दूर हमारे सोच विचार में भी नहीं आता।  बिलकुल मेरे साथ भी कई बार ये वाक्या हुआ की दिक्कत इतनी जबरदस्त आयी और लगा की भाई साहिब अब तो गए। अब न बचते पर पता नहीं कहा से *कुछ हुआ की प्रॉब्लम सोल्व*। और फिर नयी परेशानी, शायद जिंदगी इसे का नाम है।  

पर इतनी उम्र के बाद इक बात को तो पता चल ही गया की हल तो बेटे है पर क्या है , कहाँ है , कैसे होगा ये  *RnD* का subject है इसलिए समस्या बड़ी नहीं बल्कि बड़ा है उसका हल ढूंढ़ने का  process।  

और जब हम हल ढून्ढ रहे होते है तो उसका रिजल्ट निचे लिखे पॉइंट्स पर भी निर्भर करता है। 

१ अगर आप का व्यक्तित्व पॉजिटिव है : आप को हल मिल के ही रहेगा। 

२ अगर आप के साथ आप का परिवार है : आप हल खोज ही लेंगे। 

३. अगर आप भगवान पर विश्वाश भी करते है और पॉजिटिव भी है : आप की समस्या कब गायब हो जाएगी आपको पता ही नहीं चलेगा 


जैसा किसी भगत ने कहा है :

                                                    खुली छतो कै दिए कब के बुझ गए होते

कोई तो है जो इन हवाओं क पर कुतरता है 


इस सब को एक वाक्या के हिसाब से बताता हूँ। 

 मेरी मम्मी ने सब्जी बनाई जैसे ही मैंने चखा तो कहा, माँ ! सब्जी में नमक बहुत ज्यादा है वो बोली कीे  सब्जी में दही डाल लो नमक कम हो जायेगा मैंने हँस कर कहा कीे  माँ! मैं तो डाल लूंगा दादा जी कैसे खाएंगे वो बोली और पानी डाल कर  उबाल दूंगी।  मैंने फिर बोला की दीदी तो ज्यादा रस वाली नहीं खायगी तो माँ बोली उसको अकेले आलू आलू निकाल कर दे देंगे। मेरी माँ के पास सब हल है 😃😃😃


so that means, we have a solution for everything but it depends merely on our intention and process of RnD.

And Above all, We should always say in each situation: Hai Sambhab [ Everything is possible]


Tuesday, 15 November 2022

Real Relative or Reel Relative

 मित्रो, अभी कुछ दिनों पहले एक जगत का अनोखा ही रूप देखने को मिला।  या फिर यो  कहे की था तो पहले भी नजर में या सामने अब आया और पता चला की ये समाज इस कदर दिखावे या कहु के फॉर्मेलिटी में ग्रसित है के अपनापन का अहसास ही कही गुम सा हो गया है 

जैसे अगर अपने अनुभव से कहु  तो करीब करीब १० बरस पहले तक  एक व्यक्ति का दर्द सारा परिवार देखता व् सम्भालता था, उसका दर्द पूरा गांव बांटता था सब सुख दुःख में दिखावे के लिए नहीं पूरा अपनेपण  से खड़े होते थे साथ निभाते थे वो अब नजर ही नहीं आता |

ये मैआप लोगो को नेगेटिव करने के लिए नहीं कह रहा हु न ही मै कह रहा हु की अब कोई रिश्ते निभाता नहीं या सब स्वार्थी हो गए |       हमारे अपने वही है जो हमारे काम आये और साथ ही जिनके हम काम आये 😃

तो हुआ ये के मेरे एक रिस्तेदार बीमार पड़ गए।  उन्होंने लोगो से बताया नहीं पर किसी तरह ये बात उनके दूर पास के रिश्तेदारों को पता चल गई फिर क्या लगे आने कभी कोई दूर से कभी पास से, मै उनके बेटे के पास बैठा था तो *ये जान कर बड़ी ही ख़ुशी महसूस की के आज के जमाने में भी ऐसे रिश्ते नाते है जो इस तरह एक दूसरे के साथ दे रहे है।


उनके पुत्र से पता चला के इनमे से कई तो कई सालो से उनके परिवार से या उनके पिता जी से मिलने भी नहीं आये न ही फ़ोन वगेरा से संपर्क से है पर अब *देखा देखी* आ रहे है और हद तो इस बात की है हॉस्पिटल के नियम के हिसाब से जब सिक्योरिटी गार्ड मिलने नहीं देता तो उससे दो मिनट या ५ मिनट मरीज से मिलने के लिए रिश्वत या इल्तजाह कर रहे होते है। 

अगर हम सब इस सोशल मीडिया एप्लीकेशन्स जैसे व्हाट्सप्प, फेसबुक, इंस्टाग्राम से लिंक्ड रहे तो कितना अच्छा है।  सब की सब को खबर मिलते रहे सब इक दूसरे के सुख दुःख में शामिल हो।  

Connect with Whatsapp Facebook Instagram with your near and dear ones

*बजाय इसके के हम बन्दे को मिल न सके , बात कर न सके , माफ़ी मांग न सके , माफ़ कर न सके और सीथे उसके संस्कार या चौथे मै जगत दिखावी के लिए शामिल हो*



कुछ बुरा लगा हो तो माफ़ कीजियेगा । 






Friday, 11 November 2022

Help intention

 कई लोग कहते है या यो कहे की बचपन से सुनते आ रहे है हेल्प की नियत होनी चाहिए सामने वाले को मदद के लिए त्यार रहना चाहिए 

पर मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ की फ्रेंड ने मदद करने के लिए जो एक्शन लिए उनसे फायदा कम पर नुक्सान ज्यादा हो गया 😀

Let me explain with a story

रिंकू एक दिन सड़क से कुछ लेने जा रहा था, वो पैदल पैदल जा रहा थे तो सड़क पर पड़े कूड़े कबाड़ पैर भी नजर जा रही थी, वो टहल रहा था जैसे ही उसने अपनी गली का मोड़ मुडा उसे बीच सड़क के इक खडडा नजर आया



 उसने एक तरफ पड़ी ईंट उस खडे में डाला और चला गया उसे ये करते सामने वाले दूकान की गोलू आंटी देख रही थी 

कुछ दिन बाद जब वो गोलू आंटी से कुछ लेने गया तो पता चला की उसने जो ईंट लोगो के भले के लिए रखी थी  कुछ दिन तो वो ठीक रहा फिर ट्रैफिक के कारण वो ईंट खडी हो गयी और कल शाम जैसे ही स्पीड वाली कार का टायर उसपे चढ़ा उस खड़ी ईंट के कारण वो टायर फट गया और कर सामने वाले ठेले से जा टकराई। 



अब रिंकू सोच रहा था कि उसने फायदा किया या नुकसान।  आप लोग क्या कहेंगे ?


Thursday, 10 November 2022

Dukh or Sukh ( Happiness or Sorrow)

 ਦੁੱਖ ਜਾ ਸੁਖ ਬੰਦੇ ਦੇ ਆਪਣੇ ਵਰਤਾਰੇ/ਮਹਿਸੂਸ  ਕਰਨ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਦੇ ਕਦੇ ਕੋਈ ਚੀਜ ਸਾਨੂੰ ਪਹਿਲੇ ਪਲ ਦੁਖੀ ਕਰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਹੀ ਪਲ ਅਸੀਂ ਉਸ ਦਾ ਆਨੰਦ ਮਾਣਦੇ ਹੈ.  

Now you will ask how? so mai ek story share karta hu.

Jagjit ek din office se niklne ki jaldi mei tha, kyoki usko apni wife and kids ke sath friend k khar dinner karne jana tha. wo jaldi jaldi apna smate rha tha. usne office ka PC band kiya or gaadi nikali.

abhi wo 2 ya 3 kilometer hi gya tha k usko drive karte lga k gaadi puncture ho gayi. usne gaadi roki or dekha k , he was right.


gaadi puncture thi, usne khud ko kosa or bohat dukhi hua kyoki khar per sab uska wait kar rahe the.usne socha aaj ka din hi bura tha, pehle office mei lafda abb ye puncture, per door tak koi dukan nahi thi, kuch der sochne ke baad usne tyre change karne ki sochi or tyre kholne lga jab usne tyre khola wo kafi thak gya tha.

Jaise hi usne tyre fit kar k puncture tyre ko gadi mei rakhne ke liye uthaya uske hath mei kuch chubha, usne dekha to wo ek Golden Color ki Pin thi jisse tyre pucture hua tha, kuch soch kar usne wo pin apni pocket mei rakh li. Gaddi mei baith kar wo khar chala gya, friend k khar jane k baad usne baato baato mei usne wo pin dost ko dikhye, uska wo dost jewellary shop per manager tha, jo usne Jagjit ko bola ye sun kar wo khush ho gya, 

yes this was a Gold pin


abb wo God ko appreciate kar rha da, aaj us ka din bhi accha tha, office bhi kam jaldi ho gya tha, outing
bhi ho gaye the and above all Gold Pin


  


Restriction or freedom... a thought

 Kya aapne kabhi patang udaate waqt socha hai… :-) Patang aur thread ka rishta kuch ajeeb sa hota hai. Jab tak patang thread se bandhi hot...