Wednesday, 11 November 2020

जुड़ाव , एकता , प्रेम , योग

 कल मै गुरूद्वारे  सेवा करने गया तो सब लोग चंदोआ साहिब लगा रहे थे एक भाई साहिब धागा लटकते हुए देख के कहने लगे के  यह फालतू है इसे तोड़ दे , तो एक गुरसिख भाई जी कहने लगे के अब् इसका जुड़ाव प्रेम इस वस्त्र से नहीं है तो यह इसकी सुंदरता में धब्बा लगा रहा है जब  तक जुड़ा था तो पूजा के योग्य था अब् यह एक धागा है सो इसे हटा दो 


"असल  जिंदगी में भी जब तक हम अपनों से जुड़े है तब तक हमारी पहचान है  "

"धागे से कपड़ा बना पर जो जुड़ा रहा वो कपडा कहलाया जो टुटा वो धागा ही रहा ......"


Connectedness, Belonging, Love, Yoga


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Restriction or freedom... a thought

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